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रूबरू दुनिया Ankita Jain

रूबरू दुनिया

Ankita Jain

Published September 5th 2012
ISBN :
Paperback
36 pages
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 About the Book 

रूबरू उरदू भाषा का एक एसा शबद जिससे हिंदी में कई शबद जुडे हैं, जैसे जानना, अवगत होना, पहचानना, अहसास होना आदि| मौखिक रूप से इसका मतलब है कि अपने आस पास कि चीजों को जानना जिनके बारे में हमे या तो पता नहीं होता, और पता होता भी है तो कुछMoreरूबरू उर्दू भाषा का एक एसा शब्द जिससे हिंदी में कई शब्द जुड़े हैं, जैसे जानना, अवगत होना, पहचानना, अहसास होना आदि| मौखिक रूप से इसका मतलब है कि अपने आस पास कि चीजों को जानना जिनके बारे में हमे या तो पता नहीं होता, और पता होता भी है तो कुछ पूरी-अधूरी सी जानकारी के साथ | इसलिए रूबरू दुनिया का ख्याल मेरे ज़ेहन में आया क्यूंकि मैं एक ऐसी पत्रिका लोगों तक पहुँचाना चाहती हूँ जो फिल्मजगत, राजनीति या खेल से हटकर असल भारत और अपने भारत से हमे रूबरू करा सके | जो युवाओं के मनोरंजन के साथ साथ बुजुर्गों का ज्ञान भी बाटें, जो महिलाओं की महत्ता के साथ साथ पुरुषों का सम्मान भी स्वीकारे, जो बच्चों को सीख दे और बड़ों को नए ज़माने को अपनाने के तरीके बताये, जो धर्म जाति व परम्पराओं के साथ-साथ विज्ञान की ऊँचाइयों से अवगत कराये और विज्ञान किस हद तक हमारी अपनी भारतीय संस्कृति से जुड़ा है ये भी बताये, जो छोटे से अनोखे गावों की कहानियां सुनाये और जो तेज़ी से बदलते शहरों की रफ़्तार बताये, जो शर्म हया से लेकर रोमांस महसूस कराये और जो हमें अपनी आधुनिक भारतीय संस्कृति से मिलाये|सिर्फ इतना ही नहीं इस मासिक पत्रिका के मुख्य तीन उद्देश्य युवाओं को हिंदी और समाज से जोड़े रखना, समाज में व्याप्त बुराइयों को मिटाने के लिए जागरूकता फैलाने और उन्हें दूर करने में युवाओं की भूमिका को बनाये रखना, और नए लेखकों को एक प्लेटफार्म देना के अलावा हिंदी साहित्य को संग्रहित व सुरक्षित करने के साथ साथ एक ऊँचाई देना भी है| इस पत्रिका की मुख्य संपादक व प्रकाशक अंकिता जैन हैं|Hindi Monthly Magazine (Print Media) : Magazine Registration Number : MPHIN/2012/45819 (RNI Govt of India)Contact details :[email protected]